कलुषित मन

kabir
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एक बार कुछ पंडित ”गंगा-जल” की महिमा का बखान करते हुए ”कबीर” साब से बोले…”गंगा” का पानी घोर-पापियों के पाप का कलुष धोकर उन्हें पवित्र कर सकता है…..

       यह सुनकर कबीर ने अपने लोटे में रखा गंगा का पानी पंडितो को पीने के लिए दिया…इस पर पंडित बहुत क्रुद्ध हुए…एक ”नीच-जुलाहे” का यह हौसला कि ”ऊँचे-ब्राह्मणों” को अपने अपवित्र लोटे से पानी पीने को कहे….

       कबीर ने कहा….अगर गंगा जल लोटे को पवित्र न कर सका तो यह पापियों के मन पर चढ़े कलुष को कैसे धो सकता है…? दूर तक सोचना…बहुत दूर तक…….

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