माँ का प्यार – मातृ दिवस पर विशेष कविता | नम्रता कमलिनी जी

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माँ है क्या वही समझता जिसके पास नहीं होती |
जीवन देती पोषण देती आँचल में है दूध पीलाती ||

बच्चे माँ के धड़कन |
बस समझती बच्चों की तड़पन ||

बच्चे करते माँ से अनबन |
फिर भी उसका प्यार है सावन ||

माँ का प्यार माँ का मार |
इसमें बच्चों का संसार ||

माँ के बीना सुना है संसार |
कोई नहीं दे सकता माँ का प्यार ||

माँ से बच्चें इठलाते-बलखाते |
अपने जीवन की हर राज बताते ||

माँ से हम वह प्यार पाते |
जिसका ऋण चूका नहीं पाते ||

माँ का प्यार अथाह सागर|
हम याद करते है बस क्षण-भर ||

माँ की ममता में है अमृत |
बच्चे रहते माँ के अश्रत ||

माँ के अन्दर देवी की मूरत |
बच्चों के लिए सबसे प्यारी माँ की सूरत ||

जिसके पास है माँ का प्यार |
खुशियों से भरा है उसका संसार ||

~ ब्रह्मप्रिया नम्रता कमलिनी जी

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