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Shree Krishna purn brahm swaroop is dhara par avtarit

कृष्ण कंचन, कृष्ण कुंदन, कर्म कारिणी, कोमलता, भव्यता, विशालता लिए पूर्ण ब्रह्म स्वरुप में इस धरा पर अवतरित हो इस धरा को कांतिमय, कंचनमय, सुहाषित और सुगन्धित किये…कृष्ण प्रेम, कृष्ण पूजा, कृष्ण साधना, कृष्ण उपासना, कृष्ण प्रेम का प्रतीक नहीं, कृष्ण पूर्ण प्रेम…वैसे तो प्रभु का कोई रूप नहीं, कोई रंग नहीं फिर भी कृष्ण …

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CORONA se surakshit hone me sahyogi, ye 4 prakriyayain

 “कोरोना वायरस” अति विषाक्त व खतरनाक वायरस है..!!  “कोरोना वायरस” पूरी मनुष्य जाति को पूर्णतः समाप्त कर सकता है, ये बहुत ही तेज फैलने वाला वायरस है पर “स्वच्छता में स्वस्थता” निहित है | यदि व्यक्ति “स्वच्छता” को अपनाये तो ये स्वयं ही समाप्त हो जाने वाला वायरस है ! “साफ-सफाई” और “खान-पान” पर अधिक …

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Na tum Bhakt Na tum Bhagwan

न तुम भक्त न तुम भगवान…न तुम शिष्य न तुम गुरु                  ऐसे कई तथ्य होते है जिनकी हम आलोचना नहीं कर सकते ,जिन पर हम टिपण्णी नहीं कर सकते ,फिर भी करते हैं…तथ्यहीन, निराधार विचारों को प्रकट करते हैं और खुद को उससे जोड़ अपने को समझा …

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Jeevan Pakhand me nahi Prem me lagao

ध्यान योग जन जाग्रति सेवा संस्थान द्वारा संचालित परम उत्सव गुरु पूर्णिमा सत्संग साधना शिविर वाल्मीकि आश्रम, सीता समहति स्थल (उ.प्र.) भदोही में पूज्य श्री गुरुदेव ने दुसरे सत्र में अपने साधको एवं शिष्यों को सहजता-सरलता-सद्भाव-समभावजैसे गुणों से सम्पन्न होने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि… यह जीवन जन कार्य में आयें…ईश्वर को ह्रदय में …

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”ब्रह्म” से मेरा तार-तार जुड़ा और झंकृत है – स्वामी कमलेश्वरानंद जी

”ब्रह्म” से मेरा तार-तार जुड़ा और झंकृत है : ”परम उत्सव गुरु पूर्णिमा महोत्सव” सत्संग साधना शिविर, बाल्मीकि आश्रम, सीतामढ़ी, सीता समाहित स्थल (उ.प्र.) में ”पूज्य श्री गुरुदेव” अपने साधकों एवं शिष्यों को संबोधित करते हुए अपनी ओजस्वी वाणी में दो टूक बात कही—- “हे ! जन मानस, मेरे परम प्रभु, परम आराध्य ”निखिल-तत्व” से …

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निश्चल-निष्काम-प्रेम” की जरूरत है – स्वामी कमलेश्वरानंद जी

निश्चल-निष्काम-प्रेम” की जरूरत है : ”प्रेम” के बिना पूजा…”प्रेम” के बिना साधना और ”प्रेम” के बिना भक्ति पूर्ण नहीं वही एक ”परम” सभी का मार्ग-दर्शक …मार्ग-दर्शन तो हम सबका ”वही-एक” करता है…”वशिष्ठ” का भी वही किया, ”विश्वामित्र” का भी वही किया, ”कृष्ण” का भी उसीने किया और ”क्राइस्ट” का भी…सबका उसीने मार्गदर्शन किया ,लेकिन सभी …

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Preyasi Sadhana

Kamal, I am introducing this for the first time on this Earth through you. Here the word Preyasi means the one who is dear to the Supreme soul. Dear Kamal, let all living beings consider the Supreme soul as their dear one and let all beings strive to be dear to that Lord , being …

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Indrakshi Sadhana

Indrakshi means deposition of all our sensory organs… this practice is to attain control over the five sense organs. The general meaning of Indrakshi is obtaining riches equivalent to that of Lord Indra; But son Kamal, the true meaning of Indra is controlling the sensory organs. Indra is seen as the one who is immersed …

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