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माँ का प्यार – मातृ दिवस पर विशेष कविता | नम्रता कमलिनी जी

माँ है क्या वही समझता जिसके पास नहीं होती | जीवन देती पोषण देती आँचल में है दूध पीलाती || बच्चे माँ के धड़कन | बस समझती बच्चों की तड़पन || बच्चे करते माँ से अनबन | फिर भी उसका प्यार है सावन || माँ का प्यार माँ का मार | इसमें बच्चों का संसार …

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माँ परमात्मा की सबसे सुंदर और दिव्य स्वरुप ~ नम्रता कमलिनी जी

माँ परमात्मा की सबसे सुंदर और दिव्य स्वरुप जो अपने सद्गुण से, अपने ममता, करुणा, प्रेम, भावना से सर्व जगत को सिंचित करती है | माँ एक ऐसा सुखद एहसास जिसका वर्णन शब्दों में समाहित करना अत्यंत कठिन प्रतीत होता है | जितना उसे जानने का प्रयत्न करो उतना ही रहस्यमयी सी हो जाती है, …

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