Jeevan Pakhand me nahi Prem me lagao

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ध्यान योग जन जाग्रति सेवा संस्थान द्वारा संचालित परम उत्सव गुरु पूर्णिमा सत्संग साधना शिविर वाल्मीकि आश्रम, सीता समहति स्थल (उ.प्र.) भदोही में पूज्य श्री गुरुदेव ने दुसरे सत्र में अपने साधको एवं शिष्यों को सहजता-सरलता-सद्भाव-समभावजैसे गुणों से सम्पन्न होने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि…

यह जीवन जन कार्य में आयें…ईश्वर को ह्रदय में स्थापित कर जीवन का सार्थक उपदेश ही मानव मात्र का उद्येश होना चाहिए…ऐसे प्राणियों को परमात्मा स्व में समाहित कर जीवन को पूर्णता की तरफ पहुचाने में मदद करता है…..

हे ! प्रिय जीवात्माओं आओ…मुझमे अपने आपको समाहित कर अपने इस जीवन को पूर्णता की ओर गतिशील करो…द्वेष में नहीं जीवन के उद्येश्य में लगाओ…पाखंड में नहीं जीवन को प्रेम में लगाओ…लोलुपता में नहीं ललित हो प्रभु के भजन , भरण-पोषण में लगाओ…प्रभु का पोषण सुनने में कुछ अजीब सा लगता है, पर सत्य है यह…जीवन का सृष्टीगत जो सत्कर्म है वो उसी के लिए है…वो इससे तृप्त हो आपको तृप्त करता है, इसलिए आपका हर पल यह प्रयास होना चाहिए कि आप अपने जीवन का अत्यधिक समय ही नहीं, बल्कि पूरा जीवन सत्संग, सत्कर्म, सद्धर्म के लिए अर्पित करें…

सत्संग का मतलब यह नहीं कि आप सिर्फ प्रवचन सुन लिए हो गया…सत्संग का मतलब हर वक्त आप का प्रयत्न रहे कि आप के आस-पास आप अपने लोगो के बीच हो या पराये…वैसे तो न कोई अपना न पराया सिर्फ वो है…उसके सिवा कोई नहीं…पर फिर भी आपके समकच्छ रहने वाले हो या नहीं हो, कोई बात नहीं…आपका प्रयत्न हो, आप सत्कर्म, सद्मार्ग भर उन्हें सदवेत्ता, गुणवेत्ता, निर्मल, निश्चल, पवित्र, प्रेमपूर्ण बनाने का प्रयत्न करें….आप अपना कार्य अवश्य करें…आगे प्रभु कि चाहत…….

 

– श्री स्वामी कमलेश्वरानंद जी…

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