निश्चल-निष्काम-प्रेम” की जरूरत है – स्वामी कमलेश्वरानंद जी

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निश्चल-निष्काम-प्रेम” की जरूरत है :

”प्रेम” के बिना पूजा…”प्रेम” के बिना साधना और ”प्रेम” के बिना भक्ति पूर्ण नहीं

वही एक ”परम” सभी का मार्ग-दर्शक …मार्ग-दर्शन तो हम सबका ”वही-एक” करता है…”वशिष्ठ” का भी वही किया, ”विश्वामित्र” का भी वही किया, ”कृष्ण” का भी उसीने किया और ”क्राइस्ट” का भी…सबका उसीने मार्गदर्शन किया ,लेकिन सभी में ”वो” विभिन्न ”ज्ञान-विज्ञान” से परिपूर्ण था…….

रही बात ”दीक्षा-साधना-ध्यान-योग” की ,जीवन के ”पूर्णता” की तो ”राम” जहाँ वशिष्ठ से ज्ञान प्राप्त की वही आगे चलकर ”विश्वामित्र” से भी ”ज्ञान” प्राप्त किया …”कृष्ण” जहाँ प्रारंभिक ज्ञान ”ऋषि-गर्ग” से प्राप्त की वहीँ ,आगे चलकर अपने आप में महानतम सिद्धतम योगी ”ऋषि-संदीपन” से उच्चकोटि की दीक्षाएं प्राप्त की ,पर ”गुरु” तो वही ”एक-परम” ही रहा …”गुरु” कोई भी रहे या हो ”शिष्य तभी पूर्ण हो सकता है जब वह ”श्रद्धा-विश्वास” से पूर्ण ”प्रेममय” हो अपने ”ह्रदय” में निश्चल मन से उस ”गुरु-गोविन्द” को धारण करे ……

पूर्णता प्रप्ति के लिए ”निश्चल-निष्काम-प्रेम” की जरूरत है…”प्रेम” के बिना पूजा…”प्रेम” के बिना साधना और ”प्रेम” के बिना भक्ति पूर्ण नहीं …आईये हम सब ”प्रेम” के साथ गले लगते हुए ”शक्ति-सम्पन्न” बन ”ब्रह्म” की उस लाली ”निखिल-लाली” में लाल हो जाएँ और पूरी धरा पर ”प्रेम” के बीज बोते हुए सभी को लाल करते जाए ,पूरी मानवता को निहाल करते जाए……..

~ स्वामी कमलेश्वरानंद

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